सुविचार – समझ-समझ की बात है ( अनमोल वचन ) ! Suvichar – Samajh-Samajh Ki Baat Hai ( Hindi Quotes )



दोस्तों आज हम आपके सामने बदलते समाज और हमारी बदलती समझ को मध्य नज़र रखते हुए “सुविचार – समझ-समझ की बात है ( अनमोल वचन ), { Suvichar – Samajh-Samajh Ki Baat Hai } ( Hindi Quotes )” को Share करने जा रहें हैं । उम्मीद है आपको ये सर्वश्रेष्ठ अनमोल वचन पसंद आएंगे |



सुविचार – समझ-समझ की बात है ( अनमोल वचन ) :-

 

एक वो दौर था,

जब पति….भाभी को आवाज़ लगाकर अपने घर आने की खबर पत्नी को देता था । पत्नी की छनकती पायल और खनकते खनगन बड़े उतावलेपन के साथ पति का स्वागत करते थे ।
बाउजी की बातों का ; “हाँ बाउजी – जी बाउजी” के अलावा और कोई जवाब नहीं होता था ।
आज बीटा बाप से बड़ा हो गया और रिश्तों का केवल नाम रह गया ।
ये समय समय की बात नहीं….. समझ-समझ की बात है ।

पत्नी से तो दूर हम अपने बड़ों के सामने बच्चों तक तो नहीं बतलाते थे और आज बड़े बैठे रहते हैं और हम केवल बीवी से ही बतियाते हैं ।
दादू के कंधे मानो पोती-पोतियों के लिए ही आरक्षित होते थे, काकाजी ही भतीजों के दोस्त हुआ करते थे ।
आज वही दादू वृद्धाश्रम की पहचान है और काका रिश्तेदारों की सूची का बस एक नाम है ।

बड़े पापा सभी बच्चों का ख्याल रखते थे और जैसा खिलौना अपने बच्चों के लिए खरीदते थे, वैसा ही परिवार के बाकी बच्चों के लिए खरीदते थे । आज ताऊजी सिर्फ पहचान बन कर रह गए, और छोटे के बच्चे……. पता नहीं कब जवान हो गए ।
दादी जब बिलोना करती थी तो बेटों को भले ही छाछ दे पर मक्खन तो पोतों में ही बांटती थी । दादी के बिलोनो ने पोते की आस छोड़ दी, क्यूंकि पोतों ने अपनी राह अलग मोड़ दी ।
राखी पर भुआजी-फूफाजी जब आते थे, घर में ही नहीं मोह्हले में फूफाजी को चाय-नाश्ते पर बुलाते थे । अब फूफाजी बस दादा दादी के बीमार होने पर आते है, किसी और को उनसे मतलब नहीं……

शायद मेरे शब्दों का कोई महत्व ना हो, पर कोशिश करना इस भीड़ में खुद को पहचानने की
कि हम जिन्दा हैं या बस “जी रहे हैं”

ये समय समय की बात नहीं….. समझ-समझ की बात है ।

 

अंग्रेजी ने अपना स्वांग रचा दिया, शिक्षा के चक्कर में हमने संस्कारों को ही भुला दिया ।

बालक की प्रथम पाठशाला परिवार व प्रथम शिक्षक उसकी माँ होती थी, आज परिवार ही नहीं तो पहली शिक्षक का क्या काम ?

जब बच्चा घर जिद्द करता तो उसे मास्टर का नाम से डराया जाता है और अब तो अगर शिक्षक डांट भी दे बच्चे को तो माता-पिता स्कूल में जाकर शिक्षक से लड़ते हैं ।

ये समय समय की बात नहीं….. समझ-समझ की बात है ।


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Post Author: sudhir singhmar

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