मरते हुए रावण की पांच बातें जो आपकी जिंदगी बदल दे ! RAVAN MOTIVATIONAL QUOTES { in HINDI }

मरते हुए रावण की पांच बातें जो आपकी जिंदगी बदल दे :-

दोस्तों जब श्री रामचंद्र जी ने रावण की नाभि में बाण मार दिया तो उसके मरने के समय रावण से नीति और राजनीति का ज्ञान लेने का आदेश श्री रामचंद्र जी ने लक्ष्मण को दिया । रावण ने लक्ष्मण जी को यह पांच बातें बताई जो आज के युग में भी जीवन की कठिनाईयों को सरल बनाती है ।

 

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  • अपना भेद(राज) कभी किसी को नहीं बताना चाहिए ,चाहे वह आपका सबसे करीबी ही क्यों ना हो क्योंकि समय और परिस्थिति के हिसाब से मित्र और शत्रु बदलते रहते हैं ।

 

  • आप जो भी सोचो उसे तुरंत कर देना चाहिए उसे कल पर नहीं छोड़ना चाहिए। तय किए हुए काम को कल पर छोड़ने से वह काम कितना भी अच्छा क्यों ना हो फलदायी नहीं हो पाता।

 

  •  घमंड का त्याग करना चाहिए अहंकार से ज्ञानी से ज्ञानी व्यक्ति का भी विनाश हो जाता है। अहंकार होने पर व्यक्ति को यह खुद पता नहीं चल पाता पर उसके करीबी भी उस से दूर होने लगते हैं ।

 

  • शत्रु को कभी कमजोर नहीं समझना चाहिए। रावण ने ब्रम्हाजी से वरदान के समय वानर और मनुष्य से मृत्यु ना होने का वरदान यह सोचकर नहीं लिया कि मेरे जैसे महान योद्धा को कोई भी मनुष्य या वानर कभी नहीं मार सकता इसलिए श्री राम ने मानव रूप में वानरों की सहायता से रावण का वध किया।

 

  •  कभी भी नीति को कठोर नहीं रखना चाहिए । नीति हमेशा परिस्थितियों के हिसाब से बदल जाती है । समय-समय पर अपनी नीति की समीक्षा करनी चाहिए। युद्ध से हमेशा संहार ही होता है।

 



जीवन से जुड़ी कुछ ऐसी बातें, जिन्हें हम बहुत देर से समझते हैं »»»»

आज हम आपको जीवन से जुड़ी कुछ ऐसी बातों से रूबरू कराएंगे। जिन्हें हम बहुत देर से समझ पाते हैं। हालांकि यह सब बातें हमें पता तो होती है, लेकिन किसी कारणवश हम इसे जीवन में Apply नहीं कर पाते हैं। वह कौन-कौन सी बातें हैं जो ना चाहते हुए भी हमें बहुत नुकसान पहुंचा सकती है और जिसे हम बहुत देर से समझते हैं।

 

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  • ताश के पत्तों की तरह होता है जीवन :-

 

ताश के खेल के बारे में बताया गया कि, ताश के खेल जीवन की तरह ही होते हैं। ताश के पत्तों के बंटवारे पर भी हमारा नियंत्रण नही होता है। एक बार पत्ते हमें बांट दिए जाते हैं। चाहे वह अच्छे हो या बुरे इसी सीमा तक नियति या भाग्य की भूमिका होती है। परंतु हम इस खेल को अच्छे एवं खराब ढंग से खेल सकते हैं। जैसे कि हो सकता है कोई कुशल खिलाड़ी जिसके पास खराब पत्ते आए हो फिर भी वह खेल जीत सकता है। और यह भी संभव है कि खराब खिलाड़ी के पास अच्छे पत्ते होने के बावजूद वह खेल का नाश कर बैठे। हमारी जिंदगी भी किस्मत और चुनाव का मिश्रण है इसे भली-भांति समझ कर हम किसी भी कार्य में सफल हो सकते हैं।

  • अहंकार हमारी जीवन को मुश्किल बना देती हैं :-

 

हमारी मुस्कुराहटों में भी चिंता की झलक दिखाई देती है। और हम अपनी चिंता को दूर करने के लिए खुद को विभिन्न गतिविधियों में उलझाते रहते हैं। और जब वह सारी गतिविधियां समाप्त हो जाती हैं तो हम खाली हो जाते हैं और यह खालीपन हमें परेशान करता है। और हम कहते तो हैं कि हम कुछ बड़ा करेंगे। दूसरों के भलाई के काम करेंगे दूसरों की तरह अच्छे बनेंगे। लेकिन फिर भी हम अपने अंदर को के अहंकार को खत्म नहीं कर पाते। और यही अहंकार हमारे संस्कारों के आड़े आ जाते हैं और यह हमारे जीवन के महत्वपूर्ण घटक बन जाते हैं।

 

  • बातों की वैल्यू नहीं है :-

 

आज के दौर में विश्वासघात करना, कुछ का कुछ कहना, कुछ भी कर देना, जो कुछ भी कहना उसे पूरा नहीं करना, एक सामान्य सी बात हो चुकी है। आजकल के दौर में दूसरों के साथ विश्वासघात करने को चतुरता मानी जाने लगी है लोग दूसरों के साथ विश्वासघात करके खुद को होशियार समझने लगते हैं। वह सोचते हैं कि काम बनाने के लिए लोगों को इसी तरह से बेवकूफ बनाया जाना चाहिए। लोग हमेशा ही अपने वचन का पालन नहीं करते। यह विश्वास देकर उसे पूरा नहीं करते, यह थोड़े समय के लिए फायदेमंद नजर आता है। लेकिन लंबे समय से चलते रहा तो हमारे जीवन का हिस्सा बन जाएगा और हमारी प्रगति मैं सबसे बड़ी रुकावट बन सकता है।

 

  • दूसरे के दोष ढूंढने में की होती है PHD :-

 

सभी इंसानों के मानसिक बनावट इस तरह से होती है कि, वह अपने आपको हर बात में निर्दोष समझने लगते हैं। हमें अपनी बुराइयां उसी प्रकार दिखाई नहीं पड़ते जिस प्रकार से अपनी आंख में लगा हुआ काजल नहीं दिखता। यदि कोई दूसरा व्यक्ति हमारी गलती सुझाता है तो, हमारा मन अपनी गलती स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं होता। इंसानों को खुद की गलतियां नहीं दिखती। लेकिन दूसरे के दोष ढूंढने में वह बहुत ही चतुर और सूक्ष्मदर्शी होता है। ऐसे समय में उनकी आलोचना शक्ति देखते ही बनती है। जैसे कि उन्होंने दोष ढूंढने में पीएचडी कर ली हो, लेकिन जब खुद का नंबर आता है तो ना जानें वह सारी चतुरता सारी आलोचना शक्ति कहां छुप जाती है।

  • खुद का सम्मान करें :-

 

संसार का एक विचित्र नियम है कि, बाजार में वस्तुओं की कीमत दूसरे लोग निर्धारित कर सकते हैं। लेकिन मनुष्य अपना मूल्य वह खुद ही निर्धारित करता है। और हम जितना खुद मूल्यांकन करते हैं। उससे अधिक सफलता हमें प्राप्त हो जाती है। इसलिए खुद के मूल्य को पहचानिए। इसे कभी गिरने मत दीजिए। आप खुद का सम्मान करें, तभी लोग आपका सम्मान करेंगे।



याद रखना ‘डर के आगे जीत है’ :-

 

दोस्तों आपके दिमाग में जो गलत विश्वास जो गलत यकीन बन चुका है कि आप यह नहीं कर सकते आप वह नहीं कर सकता यह नहीं होगा वह नहीं होगा एक बार असफल हो गए तो आगे भी ऐसा असफल हो जाएंगे कुछ भी ऐसी गलत धारणाएं हैं आप उसे निकाल कर बाहर फेंक दीजिए | दोस्तो इंसान के पास इतनी समझ इतनी बुद्धि होती है इतना साहस होता है कि वह किसी भी लक्ष्य को प्राप्त कर सके | किसी भी मुकाम को हासिल कर सके बस आप पर ने अंदर छुपे हुए उस जज्बे को उस हौसले को उस जुनून को बाहर निकालिए और खुद पर पूरा यकीन करिए कि आप कुछ भी कर सकते हैं इस दुनिया में कुछ भी असंभव नहीं है |

 

  • “पनीर बनाने वाले व्यक्ति को दूध के फट जाने से कभी नहीं डरना चाहिए, कहने का मतलब दोस्तों अगर कुछ गलत भी हो जाता है तो उसमें भी अच्छाई ढूंढने की कोशिश करनी चाहिए”

 

  • “अगर आज आपने अपने डर पर काबू नहीं किया तो एक दिन यही डर आप पर काबू कर लेगा और उसके बाद आप कुछ नहीं कर पाएंगे”

 

  • “ऐसे व्यक्ति से कभी मत डरो जो बहुत से काम करना जानता हो, पर हां उस व्यक्ति से जरूर डरो जो एक ही काम करना जानता हो”

 

  • “अगर आप में अपनी बुराई सुनने की या आलोचना सुनने की हिम्मत नहीं तो कभी भी कुछ नया करने की कोशिश मत कीजिएगा”

 

  • “डर को समझो और घुस जाओ डर में क्योंकि डर से जब आप बाहर निकलोगे तो आप निडर बन चुके होगे क्योंकि डर के आगे जीत है’

 

  • “जीवन में बदलाव लाने के लिए गलती होने के डर को अपने दिमाग से निकाल दो”

 

  •  “जीवन में तब नहीं डरना चाहिए जब लोग आपको समझ नहीं रहे आपको तब डरना चाहिए जब आप खुद को नहीं समझ पा रहे”

 

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Post Author: sudhir singhmar

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