25+ प्रेरणादायक अनमोल वचन ! Anmol Vachan / Suvichar / Hindi Quotes.



दोस्तों प्रस्तुत है आपके सामने कुछ ऐसी लाइने जिसे पढ कर आप अपनी ज़िंदगी में बहुत सारे बदलाव ला सकते हो


 ⁉ 🌱 *कर्म और भाग्य* 🌱 ⁉                                 ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~                       🔸 *लोग कहते हैं कि- ईश्वर सबका भाग्य लिखता है.!*                                                     🔹 *यदि ऐसा होता तो, परमात्मा सबका भाग्य बहुत ही अच्छा लिखता, और दुनिया में किसी को कोई दुःख नहीं होता.!*                                                      🔸 *पर ऐसा नहीं है- ईश्वर ने हर किसी को कर्म रूपी एक ऐसी कलम दी है, जिसके द्वारा वह अपना भाग्य स्वयं लिख सकता है.!!*✍    


     *किसी के कहने से यदि*
*”अच्छा” या “बुरा” होने*
*लगे तो ये संसार या तो*
*”स्वर्ग” बन जाये या पूरी*
*तरह से “नर्क” इसलिए ये*
*ध्यान मत दो की कौन क्या*
*कहता है,बस वो करो जो*
*”अच्छा”है और”सच्चा”है।*

*सच* बोलकर भले ही किसी का *दिल* तोड दो…

लेकिन *झूठ* बोलकर किसी का विश्वास मत तोड़ना..!


           किसी ने बर्फ से पूछा कि,
*आप इतने ठंडे  क्यूं हो ?*
बर्फ ने बडा अच्छा जवाब दिया :-
*” मेरा अतीत भी पानी;*
*मेरा भविष्य भी पानी…”*
*फिर गरमी किस बात पे रखू?*


*जब दुनिया यह कहती है कि*
*‘हार मान लो’*
*तो आशा धीरे से कान में कहती है* *कि.*
*‘एक बार फिर प्रयास करो’*
*और यह ठीक भी है.*
*”जिंदगी आईसक्रीम की तरह है,* *टेस्ट करो तो भी पिघलती है;.*
*वेस्ट करो तो भी पिघलती है,*
*इसलिए जिंदगी को टेस्ट करना  सीखो,*
*वेस्ट तो हो ही रही है.*
😃 *Life is very beautiful”* .😄


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जिंदगी में एक दूसरे के “जैसा”🙏🏻 होना जरूरी नहीं होता,🛤
एक दूसरे के लिए”होना” जरूरी होता है….!!💕


✍  वक्त की एक आदत बहुत
अच्छी है,
जैसा भी हो,  गुजर जाता है!


“कामयाब इंसान खुश
रहे ना रहे,
खुश रहने वाला कामयाब
जरूर हो जाता है


*मैंने बहुत से “इन्सान” देखे हैं, जिनके बदन पर “लिबास” नहीं होता।*

*और बहुत से “लिबास” देखे हैं, जिनके अन्दर “इन्सान” नहीं होता।*

*कोई “हालात” को नहीं समझता, तो कोई “जज़्बात” को नहीं समझता।*

*ये तो बस अपनी-अपनी “समझ” है……*

*कोई “कोरा कागज़” भी पढ़ लेता है, तो कोई पूरी “किताब” नहीं समझता।*


हारना तब आवश्यक हो जाता है
*जब लड़ाई “अपनों” से हो !*
और जीतना तब आवश्यक हो जाता है
*जब लड़ाई “अपने आप ” से हो ! !*


मंजिले मिले , ये तो मुकद्दर की बात है
*हम कोशिश ही न करे ये तो गलत बात है*


“दिखावा” और  “झूठ”बोलकर व्यवाहर बनाने से अच्छा है,*

*“सच” बोलकर “दुश्मन” बनालो। तुम्हारे साथ कभी “विश्वाशघात”नही होगा.!*


सब कहते हैं के इन्सान में ख़ुदा होता है !!*

*किससे पूछूँ के ये इन्सान कहाँ होता है.!!*🤔


*दुश्मन इतनी आसानी से कहाँ मिलते हैं*

*बहुत लोगो का भला करना पड़ता हैं।*


💐 *”सबंध” ज्ञान एवं पैसे*
*से भी बड़ा होता है,*
*क्योकि* 💐………
💐 *जब ज्ञान 📚और पैसा विफल*
*हो जाता है, तब “सबंध” से*
*स्थिति सम्भाली जा सकती है..!*💐


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*सिकन्दर उस जल की तलाश में था, जिसे पीने से मानव अमर हो जाते हैं.!*

*दुनियाँ भर को जीतने के जो उसने आयोजन किए, वह अमृत की तलाश के लिए ही थे !*

*काफी दिनों तक देश दुनियाँ में भटकने के पश्चात आखिरकार सिकन्दर ने वह जगह पा ही ली, जहाँ उसे अमृत की प्राप्ति होती !*

*वह उस गुफा में प्रवेश कर गया, जहाँ अमृत का झरना था, वह आनन्दित हो गया !*

👉 *जन्म-जन्म की आकांक्षा पूरी होने का क्षण आ गया, उसके सामने ही अमृत जल कल – कल करके बह रहा था, वह अंजलि में अमृत को लेकर पीने के लिए झुका ही था कि तभी एक कौआ 🦅जो उस गुफा के भीतर बैठा था, जोर से बोला, ठहर, रुक जा, यह भूल मत करना…!’*

*सिकन्दर ने🦅कौवे की तरफ देखा!*

*बड़ी दुर्गति की अवस्था में था वह कौआ.🦅!*

*पंख झड़ गए थे, पँजे गिर गए  थे, अंधा भी हो गया था, बस कंकाल मात्र ही शेष रह गया था !*

*सिकन्दर ने कहा, ‘तू रोकने वाला कौन…?’*

🦅 *कौवे ने उत्तर दिया, ‘मेरी कहानी सुन लो…मैं अमृत की तलाश में था और यह गुफा मुझे भी मिल गई थी !, मैंने यह अमृत पी लिया !*

🦅 *अब मैं मर नहीं सकता, पर मैं अब मरना चाहता हूँ… !*
🦅 *देख लो मेरी हालत…अंधा हो गया हूँ, पंख झड़ गए हैं, उड़ नहीं सकता, पैर गल गए हैं, एक बार मेरी ओर देख लो फिर उसके बाद यदि इच्छा हो तो अवश्य अमृत पी लेना!*

🦅 *देखो…अब मैं चिल्ला रहा हूँ…चीख रहा हूँ…कि कोई मुझे मार डाले, लेकिन मुझे मारा भी नहीं जा सकता !*

🦅 *अब प्रार्थना कर रहा हूँ  परमात्मा से कि प्रभु मुझे मार डालो !*

🦅 *मेरी एक ही आकांक्षा है कि किसी तरह मर जाऊँ !*

🦅 *इसलिए सोच लो एक बार, फिर जो इच्छा हो वो करना.’!*

🦅 *कहते हैं कि सिकन्दर  सोचता रहा….बड़ी देर तक…..!*

*आखिर उसकी उम्र भर की तलाश थी अमृत !*💧

*उसे भला ऐसे कैसे छोड़ देता !*

*सोचने के बाद फिर चुपचाप गुफा से बाहर वापस लौट आया, बिना अमृत पिए !*

*सिकन्दर समझ चुका था कि जीवन का आनन्द ✨उस समय तक ही रहता है, जब तक हम उस आनन्द को भोगने की स्थिति में होते हैं!*

*इसलिए स्वास्थ्य की रक्षा कीजिये !*
*जितना जीवन मिला है,उस जीवन का भरपूर आनन्द लीजिये !*
❣🥀 *हमेशा खुश रहिये ?*❣🥀

*दुनियां में सिकन्दर कोई नहीं, वक्त सिकन्दर होता है..*


*खतरे के*
*निशान से ऊपर बह रहा है*
*उम्र का पानी…*

*वक़्त की बरसात है कि*
*थमने का नाम नहीं*
*ले  रही…*

*आज दिल कर रहा था,*
*बच्चों की तरह रूठ ही जाऊँ,*
*पर…*

*फिर सोचा,*
*उम्र का तकाज़ा है,*
*मनायेगा कौन…*


*रखा करो नजदीकियां,*
*ज़िन्दगी का कुछ भरोसा*
*नहीं…*

*फिर मत कहना*
*चले भी गए*
*और बताया भी नहीं…*

*चाहे जिधर से गुज़रिये,*
*मीठी सी हलचल*
*मचा दीजिये…*

*उम्र का हरेक दौर मज़ेदार है,*
*अपनी उम्र का*
*मज़ा लिजिये…*

    *””सदा मुस्कुराते रहिये””*


*मँज़िले बड़ी ज़िद्दी होती हैँ , हासिल कहाँ नसीब से होती हैं !*

*मगर वहाँ तूफान भी हार जाते हैं , जहाँ कश्तियाँ ज़िद पर होती हैँ !*


*भरोसा ” ईश्वर ” पर है, तो जो लिखा है तकदीर में, वो ही पाओगे !*

*मगर , भरोसा अगर ” खुद ” पर है ,तो ईश्वर वही लिखेगा , जो आप चाहोगे !!!*


*उम्मीदें तैरती रहती हैं,*
*कश्तीयां डूब जाती है,*
*कुछ घर सलामत रहते हैं,*
*आँधियाँ जब भी आती है..!!*

*बचा ले जो हर तूफां से,*
*उसे “आश” कहते हैं…*                       
*बड़ा मज़बूत है ये धागा,*
*जिसे “विश्वास” कहते है…!!*

*उम्मीदें तैरती रहती हैं,*
*कश्तीयां डूब जाती है,*
*कुछ घर सलामत रहते हैं,*
*आँधियाँ जब भी आती है..!!*

*बचा ले जो हर तूफां से,*
*उसे “आश” कहते हैं…*                       
*बड़ा मज़बूत है ये धागा,*
*जिसे “विश्वास” कहते है…!!*


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मत परेशान हो मस्त रहो व्यस्त रहो क्योंकि

1. चालीस साल की अवस्था में “उच्च शिक्षित” और “अल्प शिक्षित” एक जैसे ही होते हैं। (ब्लकि अल्प शिक्षित अधिक कमा लेते हैं)

2. पचास साल की अवस्था में “रूप” और “कुरूप” एक जैसे ही होते हैं। (आप कितने ही सुन्दर क्यों न हों झुर्रियां, आँखों के नीचे के डार्क सर्कल छुपाये नहीं छुपते)

3. साठ साल की अवस्था में “उच्च पद” और “निम्न पद” एक जैसे ही होते हैं।(चपरासी भी अधिकारी के सेवा निवृत्त होने के बाद उनकी तरफ़ देखने से कतराता है)

4. सत्तर साल की अवस्था में “बड़ा घर” और “छोटा घर” एक जैसे ही होते हैं। (घुटनों का दर्द और हड्डियों का गलना आपको बैठे रहने पर मजबूर कर देता है, आप छोटी जगह में भी गुज़ारा कर सकते हैं)

5. अस्सी साल की अवस्था में आपके पास धन का “होना” या “ना होना” एक जैसे ही होते हैं। ( अगर आप खर्च करना भी चाहें, तो आपको नहीं पता कि कहाँ खर्च करना है)

6. नब्बे साल की अवस्था में “सोना” और “जागना” एक जैसे ही होते हैं। (जागने के बावजूद भी आपको नहीं पता कि क्या करना है).

जीवन को सामान्य रुप में ही लें क्योंकि जीवन में रहस्य नहीं हैं जिन्हें आप सुलझाते फिरें।

आगे चल कर एक दिन हम सब की यही स्थिति होनी है इसलिए चिंता, टेंशन छोड़ कर मस्त रहें स्वस्थ रहें।

यही जीवन है और इसकी सच्चाई भी।


✋आज सुविचार

“चैन से जीने के लिए चार रोटी और दो कपड़े काफ़ी हैं “।
“पर ,बेचैनी से जीने के लिए चार मोटर, दो बंगले और तीन प्लॉट भी कम हैं !!”


“आदमी सुनता है मन भर ,,
सुनने के बाद प्रवचन देता है टन भर,,”
और खुद ग्रहण नही करता कण भर ।।”


सुखमय जीवन जीने के लिए

अच्छी बातें*

👉 जीवन में आने वाली हर चुनौती को स्वीकार करे।
👉 अपनी पसंद की चीजों के लिये खर्चा करें।
👉 इतना हंसिये कि पेट दर्द हो जाये।
👉 आप कितना भी बुरा नाचते हों, फिर भी नाचिये। उस खुशी को महसूस कीजिये।
👉 फोटोज् के लिये पोज् : बिल्कुल छोटे बच्चे बन जाइये।
👉 हर पल को खुशी से जीने को ही जिंदगी कहते है।
👉 “जिंदगी है छोटी,” हर पल में खुश रहो।
👉 “काम में खुश रहो,” आराम में खुश रहो।
👉 “आज पनीर नहीं,” दाल में ही खुश रहो।
👉 “आज गाड़ी नहीं,” पैदल ही खुश रहो।
👉 “जिस को देख नहीं सकते,” उसकी आवाज से ही खुश रहो।
👉 “जिसको पा नहीं सकते,” उसके बारे में सोच कर ही खुश रहो।
👉 “बीता हुआ कल जा चुका है,” उसकी मीठी याद में ही खुश रहो।
👉 “आने वाले कल का पता नहीं,” इंतजार में ही खुश रहो।
👉 “हंसता हुआ बीत रहा है पल,” आज में ही खुश रहो।
👉 “जिंदगी है छोटी,” हर हाल में खुश रहो।

😊😊😊😊😊😊


*दुख के दस्तावेज़ हो*
*या सुख की वसीयत..*

*ध्यान से देखेगे तो*
*नीचे ख़ुद के ही दस्तख़त मिलेंगे ।।*


*सबसे सुंदर बात*

“”यदि आपको *किसी एक* से शिकायत है तो *उससे* बात कीजिये

यदि आपको *अधिकतर लोगों* से शिकायत है तो *खुद* से बात कीजिये””


🌹 *AAJ KI ACHHI BAAT*🌹

दुनिया में कोई भी चीज़ अपने आपके लिए नहीं बनी।
दरिया -: खुद अपना पानी नहीं पीता।
पेड़ -: खुद अपना फल नहीं खाते।
फूल -: अपनी खुशबु अपने लिए नहीं बिखेरते।
मधुमक्खी -: खुद अपना शहद नही खाती!
मालूम है क्यों..??
क्योंकि दूसरों के लिए ही जीना ही असल जिंदगी हैं।


💞मुझे अपनी जिंदगी में
आज एक चीज की तमन्ना है..

             *”मेरे मालिक”*

जिस जिस की आंखें ये पढ रही है
उसका दामन सदा ”खुशियों” से भरा रखना🌹


*हे प्रभू*
*न किसी का फेंका हुआ मिले,*
*न किसी से छीना हुआ मिले,*
*मुझे बस मेरे नसीब मे*
*लिखा हुआ मिले,*
*ना मिले ये भी तो*
*कोई ग़म नही*
*मुझे बस मेरी मेहनत का*
*किया हुआ मिले*..


*💐अच्छे किरदार, अच्छे संस्कार, और..अच्छे विचार वाले लोग..💐*
*हमेशा साथ रहते हैं, दिलो में भी , लफ्जो में भी,और दुआओ में भी और आप उन में से एक हैं ।*

💐😊 *मुस्कुराते रहिये*😊💐


🙏🙏

🍀🍀🍀
✍🏻इतना आसान नही *जीवन*
का *किरदार निभा पाना* ।
*इंसान को बिखरना* पड़ता है ,
*रिश्तो को समेटने* के लिए ।


ऐसा नहीं है कि  *दुःख* बढ़ गए है
बल्कि *”सच्चाई”* यह है कि
*”सहनशीलता”* कम हो गयी है

जिसको *”सहना”* आ गया
उसको *”रहना”* आ गया |

*”स्वयंम् विचार कीजिए”*


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*एक जैसी ही दिखती थी माचिस की वो तीलियाँ,*
*कुछ ने “दीए” जलाये और कुछ ने “घर”,*


*मिली हैं रूहें तो, रस्मों की बंदिशें क्या है,*
*यह जिस्म तो ख़ाक हो जाना है फिर रंजिशें क्या हैं,*


*है छोटी सी ज़िन्दगी तकरारें किस लिए,*
*रहो एक दूसरे के दिलों में यह दीवारें किस लिए,*


*जो ‘आपकी-खुशी’ के लिए ‘अपनी हार’ मान लेता हो…*

*उससे ‘आप’ कभी भी नही ‘जीत’ सकते हो..!*


जीवन में हम अपनी
“image”
कितनी भी अच्छी बनाने की कोशिश करें तो भी
“quality”
सामने वाले व्यक्ति के मन की
“clearity” पर निर्भर होती है


अच्छे मित्र,
अच्छे रिश्तेदार,
और अच्छे विचार,
जिसके पास होते है,
उसे दुनिया की कोई भी ताकत
हरा नहीं सकती…


*”लफ़्ज़” “आईने” हैं*
*मत इन्हें “उछाल” के चलो,*

  *”अदब” की “राह” मिली है तो*
*”देखभाल” के चलो,*

*मिली है “ज़िन्दगी” तुम्हे*
*बस इसी “मकसद” से,*

   *”सँभालो” “खुद” को  और*
*”अपनों” को “सँभाल” के चलो।*


💫 *अच्छे लोगो की संगत में रहो :*

          क्योंकि

         *सुनार का “कचरा” भी …*
*बनिये की “बादाम” से महंगा होता है …..*


*काँटों पर चलकर फूल खिलते हैं,*
*विश्वास पर चलकर .*
*भगवान .. मिलते हैं,*

*एक बात सदा याद रखना दोस्त!!*

*सुख में सब मिलते है, लेकिन*
*दुख में सिर्फ अपने.दोस्त और.*
*भगवान .. मिलते* *है. .*


*तारीफ और खुशामद में,*
*बस जरा सा फर्क है…!*
*तारीफ आदमी के काम की होती है ,*
*और खुशामद काम के आदमी की…!*


*लफ्ज ही होते हैं इंसान का आईना !!*
*शक्ल का क्या है ..*
*वो तो उम्र और हालात के साथ, अक्सर बदल जाती है …!!*



NOTE ⇒ हमारा उद्देश्य ज्ञान को बांटना (share) है और यह काम हम अकेले नहीं कर सकते क्योंकि इस दुनिया का सारा ज्ञान हमारे पास नहीं है और हम भी आपकी तरह एक ही सामान्य व्यक्ति है जो दिन में खुली आँखों से सपने देखते है और उन्हें पूरा करने के लिए कोशिश करते रहते है | दोस्तों ज्ञान बांटने से बढ़ता है इसलिए आप भी HINDI के इस अनमोल मंच से जुड़े एंव अपने ज्ञान को हमारे साथ share करें, हम आपके द्वारा भेजे गए सभी अच्छे लेखों को Website पर publish करेंगे| आप अपने लेख हमें Whattsapp Number ( 85569-78342 ) पर भेज सकते है



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Post Author: sudhir singhmar

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