परिस्तिथियों से समझौता ! Hindi Story 2018 ! Motivational, Inspirational, Short story { in Hindi }



परिस्तिथियों से समझौता ! Hindi Story 2018 ! Motivational, Inspirational, Short story :-

 दोस्तों हम सभी के जीवन में समस्याएं तो हमेशा ही आती हैं, लेकिन फर्क इस बात से पड़ता है कि आप उन समस्याओं का सामना कैसे करते हैं | मैं आपको एक छोटी सी कहानी सुनाने जा रहा हूं, जिससे आपको Idea हो जाएगा कि अगर कोई समस्या आपके जीवन में आए तो आप उसका सामना कब और कैसे करें |

एक समय की बात है, एक अध्यापक बच्चों को कुछ पढ़ा रहे थे  |उन्होंने एक छोटे से बर्तन में पानी लिया और उसने एक मेंढक को डाल दिया | पानी में जाते ही मेंढक आराम से उसमे खेलने-कूदने लगा | थोड़ी देर बाद अध्यापक ने उस बर्तन को गैस पर रखवा दिया और उसे नीचे से गर्म करना शुरू किया | पानी जैसे-जैसे गर्म हो रहा था वह अपने आप को उस टेंपरेचर में एडजस्ट कर ले रहा था | टेंपरेचर धीरे-धीरे बढ़ता चला जा रहा था और मेंढक भी अपने आप को उस टेंपरेचर के हिसाब से एडजस्ट कर लेता था | धीरे-धीरे टेंपरेचर और भी ज्यादा हो गया | एक समय ऐसा भी आया जब पानी उबलने लगा और अब मेंढक की छमता जवाब देने लगी |

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बर्तन में रूके रहना अब पॉसिबल नहीं था | मेंढक ने जब देखा कि पानी अब बहुत ज्यादा गर्म हो गया है तो उसे बाहर निकलने के लिए छलांग लगाया, लेकिन वह ऐसा नहीं कर पा रहा था | अपनी पूरी ताकत लगाने के बावजूद भी उस पानी से भरे बर्तन से नहीं निकल पा रहा था क्योंकि वह पानी के टेंपरेचर में अपने आपको एडजस्ट करने में पूरी तरह अपनी ताकत खो चुका था | कुछ ही देर में मेंढक उस बर्तन से बाहर ना आप आने की वजह से उसी में मर गया |

अब अध्यापक ने बच्चों से पूछा कि मेंढक को किसने मारा ?

सभी बच्चों ने कहा गर्म पानी ने, लेकिन अध्यापक ने बताया कि बैठक को गर्म पानी ने नहीं मारा बल्कि वह खुद अपनी सोच से मरा है | सभी बच्चे कंफ्यूज हो गए और अध्यापक से पूछने लगे ,कि वह कैसे ? तब उन्होंने बताया कि जब मेंढक को छलांग मारने की आवश्यकता थी, उस समय वह तापमान को एडजस्ट करने में लगा था | उसने उस समय अपनी क्षमता का प्रयोग नहीं किया लेकिन तापमान जब बहुत ज्यादा बढ़ गया तब तक वह कमजोर हो चुका था उसने अपनी सारी शक्ति टेंपरेचर को एडजस्ट करने में लगा दिया था और जरूरत पड़ने पर छलांग नहीं लगा सका |

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दोस्तों मेंढक के साथ जो हुआ वह हमारी जिंदगी की आम बात है | हम अपनी परिस्थितियों से हमेशा समझौता करने में लगे रहते हैं और उन परिस्थितियों से तब तक नहीं निकलने का प्रयास करते जब तक परिस्थितियां कुछ ज्यादा खराब नहीं हो जाती | जब परिस्तिथिआ हम पर पूरी तरह से भरी हो जाती है, तब हम सोचते है, की काश हमने भी समय पर छलांग मारी होती | दोस्तों अच्छी और बुरी हर तरह की परिस्थितियां इंसान के सामने आती हैं लेकिन आपको परिस्थितियों से समझौता नहीं करना है | बहुत सारे लोग अपने भाग्य को बुरा समझ क्र अपना जीवन काटते है |

Thought—–‘हर पक्षी बरसात के मौसम अपना बसेरा ढूंढता है, लेकिन बाज बारिश से बचते हुए बादलों के उपर उड़ता है,समस्याएं सभी के सामने है और सामान है लेकिन रवैया (एटीच्यूड) मायने रखता है’


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Post Author: sudhir singhmar

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